क्या अब 16 की उम्र में संबंध बनाना होगा वैध? सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई चौंकाने वाली याचिका

📰 सुप्रीम कोर्ट में याचिका: शारीरिक संबंध बनाने की उम्र (Age of consent is 16 years) घटाकर 16 साल करने की मांग

देश की सर्वोच्च अदालत में एक अनोखी और संवेदनशील याचिका दायर की गई है, जिसमें सहमति से शारीरिक संबंध बनाने की वैधानिक उम्र (Age of consent is 16 years) को 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने की सिफारिश की गई है।

यह याचिका किसी आम व्यक्ति ने नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने दायर की है। उन्होंने यह याचिका चर्चित ‘निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ’ मामले के तहत न्यायालय को दी है।

⚖️ क्या है याचिका की मुख्य मांग?

जयसिंह ने पॉक्सो अधिनियम 2012 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के अंतर्गत 16 से 18 साल की उम्र के किशोरों के बीच सहमति से बने संबंधों को अपराध घोषित किए जाने पर आपत्ति जताई है।

उनका तर्क है कि:

  • वर्तमान कानून किशोरों की स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
  • किशोरों के बीच बने प्रेम संबंधों को बलात्कार या दुर्व्यवहार जैसा अपराध मानना गलत है।
  • सहमति की उम्र बिना किसी बहस या ठोस आधार के 16 से 18 कर दी गई थी।

📊 क्या कहते हैं आंकड़े?

  • जयसिंह ने 2017 से 2021 के बीच पॉक्सो के तहत दर्ज मामलों में 180% वृद्धि का हवाला दिया।
  • उन्होंने कहा कि अधिकतर शिकायतें अंतरजातीय या अंतरधार्मिक प्रेम संबंधों में माता-पिता द्वारा की जाती हैं, न कि पीड़िता द्वारा।

🔍 अंतरराष्ट्रीय मानदंड और वैज्ञानिक शोध

  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और अन्य वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि किशोरों में यौन गतिविधियां असामान्य नहीं हैं
  • आज के किशोर जल्दी यौवन प्राप्त कर लेते हैं और सोच-समझकर संबंध बनाने में सक्षम होते हैं।
  • दुनिया के कई देशों में सहमति की उम्र पहले से ही 16 वर्ष है।

🏛️ हाईकोर्ट्स की राय

  • जयसिंह ने बॉम्बे, मद्रास और मेघालय हाईकोर्ट्स के उदाहरण भी दिए जहाँ न्यायाधीशों ने माना कि हर किशोर संबंध दुर्व्यवहार नहीं होता
  • कुछ न्यायालयों ने 16-18 आयु वर्ग के संबंधों को लेकर पॉक्सो का कठोर इस्तेमाल न करने की सिफारिश की है।

📢 क्यों है यह याचिका अहम?

  • अगर यह याचिका स्वीकार होती है, तो भारत में किशोरों के अधिकारों और यौन शिक्षा पर एक नई सोच की शुरुआत हो सकती है।
  • यह कदम शिक्षा, संवाद और जागरूकता को बढ़ावा देगा और छिपे हुए रिश्तों के जोखिम को कम कर सकता है।
  • पॉक्सो कानून के दुरुपयोग को भी रोकने में मदद मिलेगी।

इंदिरा जयसिंह की यह याचिका भारत में किशोर न्याय, यौन स्वायत्तता और मानवाधिकारों की दिशा में एक बड़ा प्रश्न उठाती है।

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