क्या नेपाल में फिर लौटेगी राजशाही? मनीषा कोइराला ने उठाए संविधान पर सवाल!

Manisha Koirala Nepal Politics: मनीषा कोइराला ने नेपाल की राजनीति पर उठाए सवाल

Manisha Koirala Nepal Politics: बॉलीवुड और नेपाली मूल की चर्चित अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में नेपाल की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और संविधान को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि नेपाल में सच्चे लोकतंत्र की कमी है और वहां के संविधान ने जनता को न्याय दिलाने में असफलता पाई है।

राजशाही के लिए जगह होनी चाहिए थी: मनीषा कोइराला

मनीषा कोइराला ने कहा कि नेपाल एक परंपराओं में रचा-बसा देश है, जहां आज भी बड़ी संख्या में लोग राजशाही का सम्मान करते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा:

“मुझे लगता है कि संविधान में राजशाही के लिए स्थान होना चाहिए था। 80-90% नेपाली आज भी राजा को मानते हैं। उस भावना को अनदेखा करना सही नहीं था।”

राजनीति सेवा है, मगर सपना धुंधला हो गया

मनीषा कोइराला, जो नेपाल के प्रसिद्ध राजनीतिक परिवार से आती हैं — उनके दादा बी.पी. कोइराला नेपाल के पहले प्रधानमंत्री थे — उन्होंने कहा:

“राजनीति एक सपना है, जो जनता के लिए देखा जाता है। लेकिन जब वह सपना हकीकत से कट जाता है, तब समस्याएं शुरू होती हैं।”

नेताओं पर भरोसा, लेकिन समझौते ने सिद्धांत छीने

मनीषा ने वर्तमान नेताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि शायद जब वे राजनीति में आए थे, तो इरादे अच्छे थे, लेकिन समय के साथ राजनीतिक समझौते और सिद्धांतों से समझौता करते-करते वे रास्ते से भटक गए।

परंपरा बनाम आधुनिकता: संतुलन जरूरी

नेपाल के सामाजिक ढांचे पर बात करते हुए मनीषा ने कहा कि नेपाली समाज एक तरफ आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, लेकिन दूसरी ओर परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा:

“दुनिया में कहीं भी नेपाली होंगे, वे लाल टीका जरूर लगाएंगे, शादीशुदा महिलाएं मंगलसूत्र जरूर पहनेंगी।”

संविधान से नहीं मिला न्याय

जब मनीषा से पूछा गया कि क्या संविधान लोगों को न्याय नहीं दे पाया, तो उन्होंने जवाब दिया:

“हां, संविधान में कई खामियां हैं। लोकतंत्र सिर्फ नाम का है। संस्थाएं राजनीतिक हस्तक्षेप से ग्रस्त हैं, और योग्यता के आधार पर काम नहीं हो पा रहा है।”

शाही परिवार की हत्या: भावनात्मक क्षण

2001 के राजमहल नरसंहार को याद करते हुए मनीषा ने बताया कि वे उस समय लंदन में शूटिंग कर रही थीं। खबर सुनते ही वे पूरी तरह टूट गईं।

“मैं फूट-फूटकर रोई थी। मेरे पिता, जो कभी नहीं रोते, वे भी फोन पर रो पड़े थे। लाखों नेपाली लोगों ने सिर मुंडवाया था। आप उस भावना को नहीं मिटा सकते।”

मनीषा कोइराला की बातें सिर्फ एक सेलिब्रिटी की राय नहीं, बल्कि एक राजनीतिक समझ रखने वाली गहराई से जुड़ी नागरिक की भावनाएं हैं। नेपाल जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश में लोकतंत्र और परंपरा के संतुलन की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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