“मेरी प्रॉपर्टी, मेरी मर्जी”: अनिरुद्ध सिंह का झंडा विवाद पर बड़ा बयान

Bharatpur Flag Controversy: राजपरिवार में नया विवाद: झंडा या शक्ति प्रदर्शन?

Bharatpur Flag Controversy: भरतपुर के राजपरिवार में एक बार फिर विवाद गर्माया है। इस बार मुद्दा है महल पर लहराया गया पचरंगा झंडा, जिसे लेकर आरोप लगाया गया कि यह जयपुर रियासत का है।

लेकिन युवराज अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट किया –

“यह झंडा भरतपुर रियासत का है, और पिछले 5 सालों से महल पर लहरा रहा है। यह कोई नया झंडा नहीं है।”

“यह सिर्फ झंडे का मामला नहीं है” – अनिरुद्ध सिंह

पंजाब केसरी डिजिटल के संपादक विशाल सूर्यकांत से विशेष बातचीत में अनिरुद्ध सिंह ने कहा:

“असल मुद्दा झंडा नहीं, बल्कि मेरे पिता के खिलाफ चल रही कोर्ट की लड़ाई और उससे जुड़े दबाव हैं। लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति जानबूझकर बनाई जा रही है ताकि हाई कोर्ट के फैसले से पहले मुझ पर दबाव डाला जा सके।”

“निजी संपत्ति में क्या लगेगा – यह मेरा अधिकार”

अनिरुद्ध ने जोर देकर कहा:

“यह मेरी निजी संपत्ति है। मैं कौन सा झंडा लगाऊं, ये मेरा निर्णय है। भारत एक स्वतंत्र देश है – जब तक मैं राष्ट्रीय ध्वज का अपमान नहीं कर रहा या किसी गैरकानूनी प्रतीक का इस्तेमाल नहीं कर रहा, तब तक किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।”

“इतिहास नहीं जानते, और बन गए महासभा के अध्यक्ष”

अनिरुद्ध ने झंडे को जयपुर का बताने वाले कुछ लोगों पर भी निशाना साधा:

“राजघरानों के झंडों का अपना इतिहास होता है। युद्ध के लिए अलग, और रोजमर्रा के लिए अलग झंडा होता है। कुछ लोग जिन्हें इतिहास की जानकारी नहीं है, वे केवल राजनीति कर रहे हैं।”

“अगर वाकई रियासत से प्यार है, तो असली मुद्दों पर लड़िए”

अनिरुद्ध ने कहा:

“अगर लोगों को भरतपुर रियासत की इतनी चिंता है, तो उन महलों और मंदिरों की बात करें जो बिक गए हैं – आगरा की हरि पर्वत कोठी, वृंदावन-मथुरा के मंदिर, बंद बरेठा का महल। झंडा तो बस बहाना है।”

“मुझ पर नज़र रखने वालों की मानसिकता खतरनाक है”

अनिरुद्ध ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके निजी जीवन में अनहेल्दी ऑब्सेशन रखते हैं:

“मैं क्या खा रहा हूं, क्या पहन रहा हूं, किससे मिल रहा हूं – यह सब लोग ट्रैक कर रहे हैं। लंदन में एक पाकिस्तानी दोस्त के साथ मिलने तक को विवाद बना दिया गया। यह मानसिकता गलत है।”

“मुझे सांप्रदायिक छवि में फिट करने की कोशिश हो रही है”

“कुछ लोग चाहते हैं कि मैं एक सांप्रदायिक, गाली-गलौज करने वाला, उग्र नेता बन जाऊं। लेकिन मेरी परवरिश वैसी नहीं हुई है। मैं इस राजनीति में शामिल नहीं होना चाहता।”

“निजी संपत्ति में घुसना अपराध है”

अनिरुद्ध ने चेतावनी दी:

“कोई भी मेरी प्रॉपर्टी में जबरन नहीं घुस सकता। अगर ऐसा हुआ तो यह कानून का उल्लंघन होगा। प्रशासन को मैंने इसकी जानकारी दे दी है।”

“मेरा स्टैंड साफ है – यह सिर्फ झंडे का मामला नहीं”

अंत में अनिरुद्ध सिंह ने दो टूक कहा:

“यह झंडा विवाद सिर्फ एक परत है। असली मुद्दा है – पारिवारिक विवाद, राजनीतिक दबाव, और मेरी स्वतंत्रता में हस्तक्षेप। मैं पारदर्शिता और कानून के रास्ते पर चलने के लिए प्रतिबद्ध हूं।”

भरतपुर झंडा विवाद ने राजपरिवार के अंदरूनी हालात को सार्वजनिक कर दिया है। जहां एक तरफ युवराज अनिरुद्ध इसे राजनीतिक दबाव बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह मामला भरतपुर की राजनीति, विरासत और शक्ति-संघर्ष की जटिलताओं को उजागर करता है।

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