Ayodhya Korean Queen Statue: 2000 साल पुराना रिश्ता फिर जीवंत! अयोध्या में कोरियाई महारानी की प्रतिमा ने रचा इतिहास
अयोध्या में कोरियाई महारानी हेओ ह्वांग-ओक की कांस्य प्रतिमा का अनावरण हुआ है। यह ऐतिहासिक पहल भारत और दक्षिण कोरिया के बीच लगभग 2000 वर्ष पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को एक बार फिर वैश्विक मंच पर उजागर करती है।
Ayodhya Korean Queen Statue: इतिहास की अद्भुत गाथा: अयोध्या में कोरियाई महारानी की प्रतिमा का अनावरण
Ayodhya में इतिहास एक बार फिर जीवंत हो उठा है। उत्तर प्रदेश के इस पवित्र और ऐतिहासिक नगर में कोरिया की महारानी Heo Hwang-ok की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया, जिसने भारत और South Korea के बीच लगभग 2,000 वर्ष पुराने संबंधों को नई पहचान दी है।
इतिहासकारों के अनुसार, महारानी हेओ ह्वांग-ओक का जन्म अयोध्या में हुआ था। भारत में उन्हें राजकुमारी सुरिरत्ना के नाम से जाना जाता था।
48 ईस्वी में समुद्री यात्रा, कोरिया की महारानी बनीं सुरिरत्ना
ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, लगभग 48 ईस्वी में राजकुमारी सुरिरत्ना समुद्री मार्ग से कोरिया पहुंचीं और वहां राजा सुरो से विवाह किया। राजा सुरो को Gaya Kingdom का संस्थापक माना जाता है।
यह विवाह केवल एक शाही गठबंधन नहीं था, बल्कि भारत और कोरिया के बीच सांस्कृतिक सेतु का आधार बना।
भारतीय संस्कृति और बौद्ध विचारधारा का प्रसार
महारानी हेओ ह्वांग-ओक को कोरिया में भारतीय संस्कृति, मूल्यों और बौद्ध विचारधारा के प्रसार का श्रेय दिया जाता है। आज भी कोरिया के कराक (Karak) कबीले से जुड़े लाखों लोग अपनी वंशावली को उनसे जोड़ते हैं।
सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति का प्रतीक
अयोध्या में इस प्रतिमा का अनावरण केवल एक स्मारक निर्माण नहीं, बल्कि भारत-कोरिया के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक रिश्तों का सशक्त प्रतीक है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल दोनों देशों के बीच
- सांस्कृतिक कूटनीति
- सॉफ्ट पावर
- सभ्यतागत संवाद
को नई मजबूती देगी।
अयोध्या में कोरियाई महारानी की प्रतिमा यह संदेश देती है कि सभ्यताएं सीमाओं से नहीं, बल्कि साझा इतिहास और संस्कृति से जुड़ती हैं — और यह रिश्ता 2000 साल बाद भी उतना ही जीवंत है।




