Loudspeaker Controversy Rajasthan: राजस्थान में रमजान के महीने में लाउडस्पीकर विवाद, विधायक बालमुकुंद आचार्य बोले ‘शिक्षा और स्वास्थ्य पर असर न पड़े’
जयपुर में रमजान के मौके पर मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर आवाज़ उठी। विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई और बीमार लोगों की सेहत पर असर नहीं पड़ना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और कानून का पालन आवश्यक है। वहीं, सरकार के कुछ मंत्री इस आपत्ति से असहमत हैं, जबकि कांग्रेस ने भी विरोध जताया।
Loudspeaker Controversy Rajasthan: जयपुर के हवा महल क्षेत्र से बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य ने रमजान के महीने में मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर आवाज़ उठाई। उन्होंने कहा कि ‘यदि लाउडस्पीकर की आवाज़ से किसी को असुविधा होती है तो यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। बच्चों की पढ़ाई और बीमार लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए आवाज़ का स्तर नियंत्रित होना चाहिए।’
उन्होंने स्पष्ट किया कि अजान (नमाज़ के लिए बुलावा) से उन्हें कोई समस्या नहीं है, लेकिन जरूरत से ज्यादा शोर अस्वीकार्य है। आचार्य ने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया और सभी धर्मों के लोगों से आग्रह किया कि सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों में अनुचित शोर न फैलाएं।
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सरकार और पार्टी में मतभेद
हालांकि, उनके बयान पर सरकार और पार्टी के कुछ सदस्य असहमत हैं। राजस्थान के मंत्री सुरेश रावत ने इस पर कहा कि ‘इस आपत्ति का उत्तर विधायक स्वयं देंगे।’ वहीं, कांग्रेस ने भी विधायक की आपत्ति पर विरोध जताया। इस स्थिति ने राजस्थान में रमजान के दौरान लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर चर्चा को फिर से उजागर कर दिया है।
रमजान का चांद देखा गया
जयपुर और राज्य के अन्य हिस्सों में रमजान का चांद बुधवार (18 फरवरी) को देखा गया। हालांकि अधिकांश इलाके बादलों से ढके थे, लेकिन जनता की गवाही के आधार पर चांद के दिखाई देने की पुष्टि हुई। रमजान का रोज़ा कल (19 फरवरी) से शुरू होगा।
मस्जिदों में तारावीह की विशेष प्रार्थनाएं भी शुरू हो गई हैं। राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में लोग एक-दूसरे को रमजान की बधाई दे रहे हैं।
सार्वजनिक सुरक्षा और सुविधा पर जोर
बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि रमजान के दौरान सार्वजनिक शांति और सुविधा का ध्यान रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। लाउडस्पीकर का स्तर सीमित होना चाहिए ताकि किसी की सेहत, पढ़ाई या मानसिक शांति पर असर न पड़े।
वहीं, कई मुस्लिम संगठनों ने कहा कि रमजान में अजान की आवाज़ पर आपत्ति करना संवेदनशील मुद्दा है। इस मुद्दे पर राज्य में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।




