Ram Mandir Trust: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ दान राशि भी लगातार बढ़ रही है। इसी बीच दान की रकम में कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मामले की जांच के लिए समिति गठित किए जाने के बाद अब लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर राम मंदिर ट्रस्ट क्या है, इसका गठन कैसे हुआ और इसके सदस्य कौन हैं।
दान विवाद ने बढ़ाई ट्रस्ट पर निगाहें
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान को लेकर सामने आए विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस छेड़ दी है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि दान की गिनती से जुड़े कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध रही है। हालांकि ट्रस्ट ने अब तक कथित चोरी की राशि को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इसी वजह से पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दी है।
कब बना था श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन 4 फरवरी 2020 को किया गया था। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में की थी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद लिया गया, जिसमें केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के लिए एक स्वतंत्र ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया था।
सरकार ने ट्रस्ट के गठन के साथ मंदिर निर्माण और उससे जुड़े सभी प्रशासनिक एवं वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी इसी संस्था को सौंप दी। इसके साथ ही लगभग 67 एकड़ भूमि भी ट्रस्ट को हस्तांतरित की गई।
ट्रस्ट की संरचना कैसी है?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 15 सदस्यों का प्रावधान है। इनमें 9 स्थायी और 6 नामित सदस्य हो सकते हैं। वर्तमान में ट्रस्ट में 14 पदाधिकारी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
ट्रस्ट को मंदिर निर्माण, रखरखाव, दान प्रबंधन और भविष्य की विकास योजनाओं से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा बोर्ड ऑफ ट्रस्टी को कुछ सदस्यों को नामित करने का भी अधिकार दिया गया है।
कौन हैं प्रमुख सदस्य?
ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास हैं, जो अयोध्या के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान की ओर से पैरवी करने वाले वरिष्ठ विधिवेत्ता के. परासरण भी ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टियों में शामिल हैं।
ट्रस्ट में विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े संतों, समाज के अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधियों, कानूनी विशेषज्ञों और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले लोगों को शामिल किया गया है। यही कारण है कि इसे केवल धार्मिक संस्था नहीं बल्कि एक व्यापक प्रतिनिधित्व वाला संगठन माना जाता है।
ट्रस्ट का पहला दान कितना था?
दिलचस्प बात यह है कि ट्रस्ट को पहला दान केंद्र सरकार की ओर से प्रतीकात्मक रूप से एक रुपये के रूप में मिला था। इसके बाद देशभर से करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार आर्थिक सहयोग दिया। छोटे दान से लेकर बड़ी धनराशि तक, लोगों के योगदान ने मंदिर निर्माण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
क्यों महत्वपूर्ण है यह ट्रस्ट?
राम मंदिर निर्माण से लेकर उसके संचालन तक की पूरी जिम्मेदारी इसी ट्रस्ट के पास है। मंदिर के वर्तमान स्वरूप, विकास योजनाओं और धार्मिक गतिविधियों के संचालन में इसकी केंद्रीय भूमिका रही है।
इसके अलावा ट्रस्ट में विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी की गई है, जिससे धार्मिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखने का संदेश जाता है। अयोध्या को वैश्विक धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी ट्रस्ट अहम भूमिका निभा रहा है।
विवाद के बाद बढ़ी जवाबदेही की मांग
दान विवाद के बाद विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने ट्रस्ट से अधिक पारदर्शिता की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए दान प्रबंधन और जांच प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक की जानी चाहिए।
फिलहाल सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। लेकिन इतना तय है कि इस विवाद ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।

