तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं का हिस्सा नहीं बनना चाहती… कानपुर की मुस्लिम युवती ने निकाह से किया इनकार, बोली– अब अपनाऊंगी हिंदू धर्म

Kanpur News: निकाह से इनकार कर उठी आवाज़ – ‘अब नहीं बनूंगी इस कुप्रथा का हिस्सा’

Kanpur News: शहर में बुधवार को उस समय हलचल मच गई जब एक मुस्लिम युवती डीएम कार्यालय पहुंचकर अपने ही परिवार के खिलाफ आवाज़ उठाई।
युवती ने कहा कि उसके परिजन उसकी शादी ऐसे समाज में करना चाहते हैं, जहां तीन तलाक और हलाला जैसी परंपराएं आज भी प्रचलित हैं।

युवती ने इन परंपराओं को ‘घिनौना और महिला विरोधी’ बताते हुए स्पष्ट कहा –

“मैं अब इस समाज का हिस्सा नहीं बनना चाहती… अब मैं वैदिक परंपरा के अनुसार हिंदू धर्म अपनाऊंगी।”

28 वर्ष की बालिग युवती ने जताया संवैधानिक अधिकार पर भरोसा

युवती ने अधिकारियों को बताया कि वह 28 वर्ष की बालिग है और भारतीय संविधान के तहत उसे किसी भी धर्म या जीवन शैली को चुनने का अधिकार है।
उसने कहा कि उसका यह फैसला पूरी तरह स्वेच्छा और स्वतंत्र इच्छा से लिया गया है, और इसमें किसी का दबाव नहीं है।

युवती ने यह भी बताया कि वह घर से बिना संपत्ति और सहयोग के निकली है, और अब स्वयं के दम पर जीवन जीना चाहती है।

हिंदू दोस्तों को फंसाने की आशंका जताई

युवती ने प्रशासन को दिए अपने प्रार्थनापत्र में कहा कि उसके कुछ हिंदू मित्र हैं, जो उसे इस कठिन समय में मानसिक सहयोग दे रहे हैं।
लेकिन, उसे आशंका है कि उसके परिजन उन दोस्तों को झूठे मामलों में फंसा सकते हैं।
इसलिए उसने प्रशासन से अनुरोध किया कि उसके मित्रों के खिलाफ बिना जांच कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए।

प्रशासन से सुरक्षा की गुहार

डीएम की अनुपस्थिति में अन्य अधिकारियों ने युवती की बात को गंभीरता से सुना।
युवती ने मांग की कि अगर उसके परिजन किसी थाने में शिकायत या केस दर्ज कराते हैं, तो जब तक निष्पक्ष जांच न हो जाए, तब तक उस पर या उसके दोस्तों पर कोई कार्रवाई न की जाए।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी युवती

कानपुर की इस घटना ने एक बार फिर महिला सशक्तिकरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर नई बहस छेड़ दी है।
युवती का साहसिक कदम इस बात का प्रतीक है कि आधुनिक भारत में महिलाएं अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हैं और पुरानी कुप्रथाओं से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

कानपुर की यह घटना सिर्फ एक सामाजिक विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं की स्वतंत्र पहचान और अधिकार का प्रतीक है।
युवती का निकाह से इनकार और धर्म परिवर्तन का फैसला यह दर्शाता है कि आज की युवा पीढ़ी कुरीतियों के खिलाफ खड़ी होने का साहस रखती है।

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