Haldighati Martyrs Day: जयपुर। हल्दीघाटी के रण में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर योद्धाओं की गौरवगाथा आज भी लोगों को प्रेरित कर रही है। इसी ऐतिहासिक विरासत को स्मरण करते हुए जयपुर के झोटवाड़ा स्थित यू एस पैराडाइस में हल्दीघाटी के वीर बलिदानियों का 450वां बलिदान दिवस श्रद्धा, सम्मान और गौरव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में इतिहास प्रेमियों, समाजजनों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर वीर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
राजा रामशाह तंवर और उनकी तीन पीढ़ियों के अद्वितीय बलिदान को किया याद
समारोह में हल्दीघाटी युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त ग्वालियर नरेश राजा रामशाह तंवर, उनके पुत्र कुंवर शालिवाहन सिंह, कुंवर भवानी सिंह, कुंवर प्रताप सिंह तथा पौत्र वीर बलभद्र सिंह के अप्रतिम बलिदान का स्मरण किया गया। वक्ताओं ने बताया कि एक ही रणभूमि में एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों द्वारा मातृभूमि की रक्षा के लिए दिया गया यह बलिदान भारतीय इतिहास की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में शामिल है।
वीरों को पुष्पांजलि, बालिकाओं ने दिखाया शौर्य
कार्यक्रम का शुभारंभ वीर बलिदानियों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इसके बाद राजपूत बालिकाओं द्वारा पारंपरिक तलवारबाजी का प्रदर्शन किया गया। बालिकाओं के साहस, अनुशासन और कौशल ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि वीरता और स्वाभिमान की परंपरा आज भी समाज में जीवंत है।
इतिहास से सीख लेने का संदेश
सभा अध्यक्ष डॉ. शिवराज सिंह तंवर ने अपने संबोधन में सभा की गतिविधियों की जानकारी देते हुए हल्दीघाटी युद्ध में राजा रामशाह तंवर और उनके परिवार के योगदान को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए दिया गया उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने युवाओं से इतिहास को केवल पढ़ने तक सीमित न रखकर उसे जीवन मूल्यों में उतारने का आह्वान किया।

युवाओं को विरासत से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. यशवर्धन सिंह झेरली ने कहा कि इतिहास केवल अतीत का विवरण नहीं, बल्कि भविष्य का मार्गदर्शक भी होता है। उन्होंने युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के त्याग से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की बात कही।
मेवाड़ की गौरवगाथा पर विशेष व्याख्यान
मुख्य वक्ता डॉ. ओमेंद्र सिंह रत्नू ने मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास, हल्दीघाटी युद्ध और राष्ट्र निर्माण में मेवाड़ की भूमिका पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राजा रामशाह तंवर और उनके परिवार का बलिदान केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का ऐसा उदाहरण है जो सदियों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि जब समाज अपने वीरों को याद रखता है, तब उसकी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय चेतना भी मजबूत होती है।
समाज ने लिया आदर्शों पर चलने का संकल्प
कार्यक्रम में राधेश्याम सिंह मावंडा और भंवर सिंह रेटा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी ने वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को समाज में आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
समारोह के अंत में उपस्थित लोगों ने वीर शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए यह संदेश दिया कि इतिहास की ऐसी गौरवगाथाएं केवल स्मरण के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की भावना को मजबूत करने के लिए भी आवश्यक हैं। 450 वर्षों बाद भी हल्दीघाटी के वीरों का बलिदान देशवासियों के लिए प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ बना हुआ है।

