Kota maternal death case: कोटा में सीजेरियन के बाद मौतों ने बढ़ाई चिंता, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
Kota maternal death case: राजस्थान के कोटा में सीजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी फेल होने के लगातार सामने आ रहे मामलों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। जेके लोन अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में इलाज के दौरान अब तक पांच महिलाओं की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं ने सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और प्रसूता देखभाल प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ताजा मामला शिवपुरा निवासी 29 वर्षीय शिरिन का है, जिसने रविवार को मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी आईसीयू में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि शिरिन को पहले निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और किडनी फेल होने के बाद संक्रमण ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
परिजनों के अनुसार शिरिन छह महीने की गर्भवती थी। 5 मई की सुबह उसे न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने बच्चेदानी का मुंह खुलने की बात कहते हुए टांके लगाने की सलाह दी। प्रक्रिया के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन दो दिन बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
परिवार का आरोप है कि शुरुआत में अस्पताल स्टाफ ने ब्लीडिंग और अन्य समस्याओं को सामान्य बताया। धीरे-धीरे शिरिन का ब्लड प्रेशर और प्लेटलेट्स गिरने लगे। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि उसका यूरिन आना बंद हो गया, जो किडनी फेल होने का संकेत माना जाता है। हालत गंभीर होने पर उसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डायलिसिस किया गया, लेकिन संक्रमण बढ़ने के बाद फिर मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा।
कोटा में यह कोई अकेला मामला नहीं है। सीजेरियन डिलीवरी के बाद 12 से अधिक महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी फेल होने की शिकायत सामने आई थी। इनमें से अब तक पांच महिलाओं की मौत हो चुकी है। मृतकों में पायल, ज्योति, प्रिया, पिंकी महावर और अब शिरिन का नाम शामिल है।
घटनाओं की टाइमलाइन भी कई सवाल खड़े करती है। 5 मई को पायल की मौत हुई थी। इसके बाद 7 मई को ज्योति ने दम तोड़ा। 9 मई को प्रिया की मौत हुई, जबकि 11 मई को पिंकी महावर की जान चली गई। अब शिरिन की मौत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसूता महिलाओं में संक्रमण तेजी से फैलने पर किडनी, लीवर और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं। यदि समय पर संक्रमण की पहचान और उपचार नहीं हो तो स्थिति जानलेवा बन जाती है। ऐसे में अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल और पोस्ट ऑपरेटिव मॉनिटरिंग बेहद अहम मानी जाती है।
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इस मामले के बाद स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में भारी नाराजगी है। लोग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह यह स्पष्ट करे कि आखिर लगातार एक जैसी घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं।
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कोटा का यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मातृ स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है। अब सभी की नजर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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