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मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी, पर फायदे में ही रहेगा NDA

नई दिल्ली संसद भवन से : विपक्ष द्वारा सरकार के खिलाफ लोकसभा में रखे गए अविश्वास प्रस्ताव को लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन मंजूर कर लिया है। अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में शुक्रवार को चर्चा होगी। आपको बता दें कि संसद का मॉनसून सत्र बुधवार से शुरू हुआ है और पहले ही दिन सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला।

संसदीय कार्य मंत्री ने प्रस्ताव पर जताई सहमति 

एनडीए की सहयोगी रही तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने इसका नोटिस लोकसभा महासचिव को दिया था, जिसका अन्य विपक्षी दलों ने भी समर्थन किया। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने भी इस प्रस्ताव को मंजूर करने पर अपनी सहमति जताई। यानी चार साल पुरानी मोदी सरकार को अब संसद में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा। बजट सत्र में भी विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था लेकिन स्पीकर ने उसे मंजूर नहीं किया था। अब चुनावी साल में सरकार ने सियासी नफा-नुकसान को समझते हुए इसकी मंजूरी दिलाकर न केवल अपनी चुनावी तैयारियों का परिचय देने की कोशिश की है बल्कि विपक्ष के इस मुद्दे को हमेशा के लिए जमींदोज कर देने की भी ठानी है।

लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार (20 जुलाई) को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी और बाद में वोटिंग होगी। मौजूदा समय में लोकसभा में सदस्यों की कुल संख्या 536 है। इसमें दो नामित सदस्य भी शामिल हैं। 9 सीट खाली हैं। यानी स्पीकर को हटा दें तो कुल संख्या 535 हो जाती है। लिहाजा, बहुमत के लिए 268 सदस्य चाहिए। लोकसभा में दलगत स्थिति के मुताबिक बीजेपी के पास कुल 273 (स्पीकर को छोड़कर) हैं। एनडीए के कुल आंकड़ों को देखें तो यह 358 तक जा पहुंचता है। यानी सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है। लिहाजा, अविश्वास प्रस्ताव से निश्चिंत है।

हथियार की काट पहले ही बना चुकी है मोदी सरका

दरअसल, बीजेपी विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के हथियार की काट पहले ही बना चुकी है। मोदी सरकार चाहती है कि अविश्वास प्रस्ताव जीतकर वह न केवल संसद में आगे की कार्यवाही सुचारू रूप से चलवाने में रणनीतिक विजय हासिल करे बल्कि मौजूदा मानसून सत्र में तीन तलाक जैसे कई अहम बिलों को पास करवाकर कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के मुस्लिम वोट बैंक में विभाजन की एक लंबी रेखा खींच दे। बता दें कि तीन तलाक से जुड़े लगभग सभी मामलों में मुस्लिम महिलाएं ही याचिकाकर्ता रही हैं। यानी बीजेपी मानती है कि एक झटके में तीन तलाक को कानूनी तौर पर अवैध कराकर वो मुस्लिम महिलाओं का वोट पा सकती है। इसके अलावा बीजेपी की नजर दलित वोट बैंक पर भी है। सरकार एससी-एसटी समुदाय के लिए संविधान संशोधन विधेयक, हायर एजुकेशन कमीशन बिल, सरोगेसी बिल, नेशनल मेडिकल कमीशन बिल, पिछड़ा वर्ग आयोग बिल लाकर सामाजिक लामबंदी की कोशिश में है।

विपक्ष एकजुट होगा
उधर, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भले ही कहा हो कि उनके पास अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पर्याप्त संख्या बल है मगर विपक्ष अच्छी तरह से जानता है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर अगर वोटिंग हुई तो मोदी सरकार ही जीतेगी लेकिन इसी बहाने विपक्ष न सिर्फ एकजुट होगा बल्कि सदन में सरकार को एकतरफा घेरने का उसे मौका भी मिलेगा। विपक्ष चाहता है कि संसद के जरिए वो न केवल मोदी सरकार के वादाखिलाफी की कहानी देशभर को बताए बल्कि गरीबों, शोषितों और दलितों से हो रहे अन्याय और जुल्म की कहानी भी संसदीय रिकॉर्डिंग में दर्ज कराए। इसके साथ ही कांग्रेस चाहती है कि इतिहास के पन्नों में मोदी सरकार भी अन्य गैर कांग्रेसी सरकारों की श्रेमी में शामिल हो जाए, जिसे अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा हो। यानी विपक्ष को अपने प्रस्ताव को सदन में मंजूरी दिलाने और उस बाबत सदन में चर्चा कराने भर से ही सांकेतिक जीत का स्वाद चखना पड़ सकता है।

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