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भाजपा शासित राज्यों के लिए चुनौती, ऐसा क्या कर दिया केरल सरकार ने ?

नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से देश में हाहाकार मचा हुआ है। सोलह दिनों तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद 17वें दिन तेल कंपनियों ने जनता को ‘राहत’ देने के नाम पर मजाक किया है। बुधवार को सुबह में सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से बताया गया है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 60 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई है। इसके पहले कि ग्राहक इस कटौती का अहसास कर पाते तेल कंपनियों ने सभी पेट्रोल पंपों और मीडिया को एक दूसरी सूचना भेजी कि असलियत में कटौती सिर्फ एक पैसे प्रति लीटर की हुई है। तेल कंपनियों का कहना है कि कीमत गणना करने वाले एक स्टाफ की वजह से ऐसी स्थिति पैदा हुई। वैसे कंपनियों की ओर से इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि यह कमी किस आधार पर की गई।

उधर, केरल सरकार ने एक रुपये की राहत देकर भाजपा शासित राज्यों और केंद्र के लिए भी सियासी चुनौती बढ़ा दी है। दरअसल, यह माना जा रहा था और खुद सरकार की ओर से भी संकेत था कि जल्द ही राहत की कोई घोषणा हो सकती है। लेकिन अब माना जा रहा है कि सरकार का आकलन है कि अगले कुछ दिनों के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में अपने आप ही कुछ गिरावट आएगी जिससे खुदरा कीमतें भी कम होंगी। एक कारण राजनीतिक भी माना जा रहा है। सरकार के लिए राजस्व मजबूत रखना जरूरी है। बताते चलें कि पेट्रोल व डीजल पर उत्पाद शुल्क में एक रुपये की कटौती करने पर केंद्र सरकार के राजस्व में 13 हजार करोड़ रुपये सालाना की कमी होती है।

 

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