उत्तर प्रदेश

महाराष्ट्र से वाराणसी चली मां ने कहा- गांव पहुंचना चाहती हूं, बच्चों को कैसे पालूंगी नहीं मालूम

वाराणसी: उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में लाकडाउन के बीच प्रवासियों का पलायन जारी है। इसमें महराष्ट्र,गुजरात,दिल्ली समेत तमाम जगहों से लोग यूपी पहुंच रहे हैं। ऐसे में मोहनसराय में जिला प्रशासन ने पैदल और ट्रकों से जा रहे प्रवासियों के लिए उनके राज्यों, जिलों के लिए बसों की व्यवस्था कर रखी है। यहां के कैम्प में महाराष्ट्र से आई एक महिला श्रमिक अपनी चार बेटियों के साथ रह रही है। उसे यहां से आजमगढ़ जाना है। लेकिन उसकी आखों में काम धंधा खोने का डर और बच्चियों के भविष्य की चिंता साफतौर पर देखी जा सकती है। 

खुशबू ने बताया कि उसकी 4 बेटियां है। फैक्ट्री में काम बंद हो गया। पैसे भी खत्म हो गए। किसी तरह 7 हजार रुपए ट्रक वाले को देकर यहां तक हम लोग पहुंचे हैं। यहां से आज़मगढ़ जाना है। 4 बेटियों को गांव पर कैसे पालेंगे नहीं मालूम। बच्ची की आंखों में चोट लगी है। डॉक्टर को भी नहीं दिखा पाए। रास्ते में किसी ने दवा दिया था। वही आंखों में डाल रहे हैं। बस किसी तरह गांव पहुंच जाएं।

सरकार को पहले ही बसों का इंतजाम करना चाहिए था 
महाराष्ट्र से आये मुन्नू ने बताया कि 300 किमी से उपर तो पैदल चला हूं। बर्फ फैक्ट्री में काम करता था। मां का अपेंडिक्स का ऑपरेशन कराना था। एक साल पहले कमाने गया था। जो 8 हजार ऑपरेशन को रखा था,सब खत्म हो गया। यहां से झारखंड जाना है। वहीं राजातालाब हाइवे पर ट्रकों के अंदर मजदूरों का आवाजाही दिखा। कुछ ट्रकों को पुलिस वालों ने पकड़कर खाली कराया तो कुछ चकमा देकर भागते दिखे। मजदूरों का कहना है कि हमारी मंजिल गांव का घर है। सरकार को बसों का इंतेजाम पहले से ही करना चाहिए था। 

कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि 100 से ज्यादे बसों को लगाया गया है।कोई भी पैदल यात्रा न करे बराबर ध्यान दिया जा रहा है।ट्रकों के लिए चेक प्वाइंट भी दो बनाये गए है।जो प्रवासी मिल रहे है,उनको कैंप में खाना पानी देकर डीटेल लेकर जांच के बाद राज्यो के बसों में बिठाकर भेजा जा रहा है।

द फ्रीडम स्टॉफ
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